True Islam– Shia, Shiyat (SHEEYAT)

KULLO YAUMIN AASHOORA, KULLO ARZIN KARBALA aap sabki duaao ka talib- Haider Alam Rizvi

तिब्बे मासूमीन अलैहिस्सलाम

· बुख़ारः- सेब खाओ कि बदन की हरारत को आराम पहुँचाता है। अन्दरूनी गर्मी को ठन्डा करता है और बुखार को खत्म करता है।

· अगर लोग सेब के फ़ायदे को जानते तो अपने मरीज़ों का इलाज हमेशा सेब से करते। (इमाम सादिक़ अ0)

· मोहम्मद बिन मुस्लिम ने नक़्ल किया है कि जब भी इमाम मोहम्मद बाक़िर अ0 को बुख़ार होता था तो इमाम सादिक़ अ0 दो कपड़ों को भिगोते थे एक को बदन पर रखते थे और ज बवह खुश्क हो जाता था तो बदल देते थे। (इमाम सादिक़ अ0)

· बुख़ार ख़त्म करने के लिये ठन्डा पानी और दुआ के मानिन्द कोई चीज़ नहीं है। (इमाम सादिक़ अ0)

· बारिश के पानी को पियो कि बदन को पाकीज़ा और दर्दों का इलाज करता है, जैसा कि परवरदिगार सूर-ए-इन्फाल आयत 11 में फ़रमाता है ‘‘और तुम पर आसमान से पानी बरसा रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक व पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दफ़ा करे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे’’। (इमाम मूसा काज़िम अ0)

· प्याज़ खाओ कि बुख़ार को ख़त्म करती है। (इमाम सादिक़ अ0)

· एक सहाबी को अर्से से बुख़ार था इमाम सादिक़ अ0 ने फ़रमाया मुँह को कुर्ते में दाखि़ल करके अज़ान और इक़ामत कहो फ़िर सात मरतबा सूर-ए-हम्द पढ़ो, सहाबी कहता है कि मैंने ऐसा किया तो शिफा हासिल हुई।

· गर्मियों में साहिबे बुख़ार पर ठन्डा पानी डालो, बुख़ार को सुकून अता करता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· हमाद बिन उसमान ने इमाम सादिक़ अ0 की खि़दमत में बुख़ार की शिकायत की, आपने फ़रमाया ‘‘एक बरतन में आयतलकुर्सी लिखकर उसमें कुछ पानी डालकर पियो।’’

· शहद को कलौंजी के साथ मिला कर तीन दफ़ा उंगली से चाट लो बुखार में आराम मिलेगा। (इमाम मूसा काज़िम अ0)

· बुखार के मर्ज़ में गुले बनफ़शा को ठण्डे पानी में मिलाकर उस शरबत को पियें आराम मिलेगा। (इमाम अली अ0)

· हमारा ज़िक्र तेज़ बुख़ार, शक व वसवसों में शिफ़ा देता है। (इमाम अली अ0)

· किरमे मेदा (पेट के कीड़े) ः अंगूर का सिरका पियो कि पेट के कीड़ों को मारता है। (इमाम अली अ0)

· सोते वक़्त सात दाने ख़ुरमा खाओ कि पेट के कीड़े मर जाते हैं। (इमाम सादिक़ अ0)

· दर्दे पहलूः उबैद बिन सालेह कहता है कि इमाम सादिक़ अ0 से दर्दे पहलू की शिकायत की। आप अ0 ने फ़रमाया दस्तरख़्वान पर बची हुई और गिरी हुई ग़िज़ा को खाओ, कहता है ऐसा किया और पहलू का दर्द ठीक हो गया।

· दर्दे शिकमः इमाम सादिक़ अ0 ने फ़रमाया एक शख़्स जनाबे अमीरूल मोमेनीन की खि़दमत में आया और दर्दे शिकम की शिकायत की। इमाम अ0 ने पूछा ज़ौजा है? उसने कहा हाँ, आप अ0 ने फ़रमाया ज़ौजा से कुछ रूपिया ब-उनवाने हदिया हासिल कर, उससे शहद ख़रीद और उसमें बारिश का पानी मिलाकर पियो कि परवरदिगार फ़रमाता हैः

· 1. और हमने आसमान से नाज़िल किया मुबारक पानी (सूर-ए-काफ़ आयत 10)

· 2. उन मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख़तलिफ़ रंग होते हैं लोगों (की बीमारी) के लिये शिफ़ा है। (सूर-ए-नहल आयत 69)

· 3. फ़िर अगर वह (ज़ौजा) अपनी मर्ज़ी से तुम्हें कुछ (दे) तो खाओ बेहतर और मुफ़ीद है सूर-ए-निसा, आयत 4।

· चावल को धो कर साये में सुखाओ फिर भून कर अच्छी तरह कूट लो और रोज़ाना सुबह को एक मुट्ठी खा लिया करो, दर्दे शिकम में मुफ़ीद है। (इमाम सादिक़ अ0)

· सेब खाओ मेदे को पाक करता है। (इमाम अली अ0)

· अमरूद मेदे को साफ़, क़ल्ब में जिला और दर्द में सुकून पैदा करता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· अमरूद खाना दिल को जिला देता है और अन्दरूनी दर्दों को ख़त्म करता है। (इमाम अली अ0)

दफ़ा-ए-बलग़म, रूतूबत और ज़ियादती अक्ल

· क़ुरआन पढ़ना, मिसवाक करना और कुन्दुर खाना बलग़म में फ़ायदा करता है। (अमीरूल मोमेनीन अ0)

· मुनक़्क़ा सफ़रा को दुरूस्त करता है, बलग़म को दूर करता है, पुटठों को मज़बूत करता है और नफ़्स को पाकीज़ा करता है और रंज व ग़म को दूर करता है।

· सिरका ज़ेहन को तेज़ करता है और अक़्ल को ज़्यादा करता है। (हज़रत अली अ0)

· कंघा करना दाफ़े बलग़म है। (इमाम मो0 बाक़िर अ0)

· सिरका क़ल्ब को ज़िन्दा करता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· मिसवाक करना, क़ुरआन पढ़ना बलग़म को निकालता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· मूली खाने से गैस ख़ारिज होती है, पेशाब खुल कर होता है और बलग़म साफ़ होता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· मूली में तीन ख़ासियतें हैंः पत्ता ज़हरीली हवा को बदन से निकालता है, रेशा बलग़म को दूर करता है और तुख़्म हाज़िम है।

· प्याज़ दहन (मुँह) की बदबू दूर करती है, बलग़म कम करके सुस्ती व थकन को मिटाती है, मुबाशरत की कुव्वत में इज़ाफ़ा करती है, नस्ल को बढ़ाती है, बुख़ार को ख़त्म करती है और बदन ख़ुशरंग हो जाता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· क़ुरआन पढ़ने से, शहद खाने से, और दूध पीने से हाफ़िज़ा बढ़ता है। (इमाम रेज़ा अ0)

सफेद दाग़ (बरस) का इलाज

· इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 ने फ़रमाया बनी इस्राईल में कुछ लोग सफ़ेद दाग़ में मुब्तिला हुए, जनाबे मूसा को वही हुई कि उन लोगों को दस्तूर दो कि गाय के गोश्त को चुक़न्दर के साथ पका कर खायें।

· किसी ने इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 से सफ़ेद दाग़ की शिकायत की। आपने फ़रमाया नहाने से पहले मेहदी को नूरा में मिला कर बदन पर मलो।

· एक शख़्स ने इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 से बीमारी बरस की शिकायत की, आपने फ़रमाया तुरबते इमामे हुसैन अ0 की ख़ाक बारिश के पानी में मिलाकर इस्तेफ़ादा करो।

· सहाबी इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 के बदन पर सफ़ेद दाग़ पैदा हो गए। आपने फ़रमाया सूर-ए-या-सीन को पाक बरतन पर शहद से लिख कर धो कर पियो।

· जो खाने के पहले लुक़्मे पर थोड़ा सा नमक छिड़क कर खाये, चेहरे के धब्बे ख़त्म हो जाएंगे।

सेहते चश्म

· अगर आँख में तकलीफ़ हो तो जब तक ठीक न हो जाये बायीं करवट सो। (रसूले ख़ुदा स0)

· मिसवाक करने से आँख की रौशनी में इज़ाफ़ा होता है। (हज़रत अली अ0)

· जब भी तुम में से किसी की आँख दर्द करे तो चाहिये कि उस पर हाथ रख कर आयतल कुर्सी की तिलावत करे इस यक़ीन के साथ कि इस आयत की तिलावत से दर्दे चश्म ठीक हो जायेगा। (इमाम अली अ0)

· जो सूर-ए-दहर की तीसरी आयत हर रोज़ पढ़े आँख की तकलीफ़ से महफ़ूज़ रहेगा। (इमाम अली अ0) 

· खाने के बाद हाथ धो कर भीगे हाथ आँख पर फेरे दर्द नहीं करेगी। (इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0)

· तीन चीज़ें आँख की रोशनी में इज़ाफ़ा करती हैं। सब्ज़े पर, बहते पानी पर और नेक चेहरे पर निगाह करना। ( इमाम मूसा काज़िम अ0)

पेशाब की ज़्यादतीः

· इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0 से एक शख़्स ने पेशाब की ज़्यादती की शिकायत की तो आप अ0 ने फ़रमाया ः काले तिल खा लिया करो।

दस्तूराते उमूमी आइम्मा-ए-ताहिरीन अ0

· बीमारी में जहाँ तक चल सको चलो।  (इमाम अली अ0)

· जो उम्र ज़्यादा चाहता है वह सुबह जल्दी नाश्ता खाये। (इमाम अली अ0)  

· रसूले ख़ुदा को अनार से ज़्यादा रूए ज़मीन का कोई फल पसन्द नहीं था। (इमाम मो0 बाक़िर अ0)

· गाय का ताज़ा दूध पीना संगे कुलिया में फ़ायदा करता है। (इमाम मो0 बाक़िर अ0)

· खड़े होकर पानी पीना दिन में ग़िज़ा को हज़म करता है और शब में बलग़म पैदा करता है।  ( इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0)

· हज़रत अली अ0 फ़रमाते हैं कि जनाबे हसने मुज्तबा अ0 सख़्त बीमार हुए। जनाबे फ़ातेमा ज़हरा स0 बाबा की खि़दमत में आयीं और ख़्वाहिश की कि फ़रज़न्द की शिफ़ा के लिये दुआ फ़रमायें उस वक़्त जिबराईल अ0 नाज़िल हुए और फ़रमाया ‘‘या रसूलल्लाह स0 परवरदिगार ने आप अ0 पर कोई सूरा नाज़िल नहीं किया मगर यह कि उसमें हरफ़े ‘फ़े’ न हो और हर ‘फ़े’ आफ़त से है ब-जुज़ सूर-ए-हम्द के कि उसमें ‘फ़े’ नहीं है। पस एक बर्तन में पानी लेकर चालीस बार सूर-ए-हम्द पढ़ कर फूकिये और उस पानी को इमाम हसन अ0 पर डालें इन्शाअल्लाह ख़ुदा शिफ़ा अता फ़रमाएगा।’’

· अपने बच्चों को अनार खिलाओ कि जल्द जवान करता है। (इमाम जाफ़रे सादिक़ अ0)

· ख़रबूज़ा मसाने को साफ़ करता है और संग-मसाना को पानी करता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· चुक़न्दर में हर दर्द की दवा है आसाब को क़वी करता है ख़ून की गर्मी को पुरसुकून करता है और हड्डियों को मज़बूत करता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· जिस ग़िज़ा को तुम पसन्द नहीं करते उसको न खाना वरना उससे हिमाक़त पैदा होगी। (इमाम सादिक़ अ0)

· खजूर खाओ कि उस में बीमारियों का इलाज है।

· दूध से गोश्त में रूइदगी और हड्डियों में कुव्वत पैदा होती है। (इमाम सादिक़ अ0)

· अन्जीर से हड्डियों में इस्तेक़ामत और बालों में नमू पैदा होती है और बहुत से अमराज़ बग़ैर इलाज के ही ख़त्म हो जाते हैं। (इमाम सादिक़)

खाना खाने के आदाब

· तन्हा खाने वाले के साथ शैतान शरीक होता है। (रसूले ख़ुदा स0)

· जब खाने के लिये चार चीज़ें जमा हो जायें तो उसकी तकमील हो जाती है। 1. हलाल से हो 2. उसमें ज़्यादा हाथ शामिल हों 3. उसमें अव्वल में अल्लाह का नाम लिया जाये और 4. उसके आखि़र में हम्दे ख़ुदा की जाये। (रसूले ख़ुदा स0)

· सब मिल कर खाओ क्योंकि बरकत जमाअत में है। (रसूले ख़ुदा स0)

· जिस दस्तरख़्वान पर शराब पी जाये उस पर न बैठो। (रसूले ख़ुदा स0)

· जो शख़्स ग़िज़ा कम खाये जिस्म उसका सही और क़ल्ब उसका नूरानी होगा। (रसूले ख़ुदा स0)

· चार चीज़ें बरबाद होती हैंः शोराज़ार ज़मीन में बीज, चांदनी में चिराग़, पेट भरे में खाना और न एहल के साथ नेकी। (इमाम सादिक़ अ0)

· जो शख़्स क़ब्ल व बाद ग़िज़ा हाथ धोए ताहयात तन्गदस्त न होए और बीमारी से महफ़ूज़ रहे। (इमाम सादिक़ अ0)

· क़ब्ल तआम खाने के दोनों हाथ धोए अगर चे एक हाथ से खाना खाये और हाथ धोने के बाद कपड़े से ख़ुश्क न करे कि जब तक हाथ में तरी रहे तआम में बरकत रहती है। (इमाम सादिक़ अ0) 

हज़रत अली अ0 फ़रमाते हैंः

· कोई ग़िज़ा न खाओ मगर यह कि अव्वल उस तआम में से सदक़ा दो।

· ज़्यादा ग़िज़ा न खाओ कि क़ल्ब को सख़्त करता है, आज़ा व जवारेह को सुस्त करता है नेक बातें सुनने से दिल को रोकता है और जिस्म बीमार रहता है।

· ज़िन्दा रहने के लिये खाओ, खाने के लिये ज़िन्दा न रहो।

· जो ग़िज़ा (लुक़्मे) को ख़ूब चबाकर खाता है फ़रिश्ते उसके हक़ में दुआ करते हैं, रोज़ी में इज़ाफ़ा होता है और नेकियों का सवाब दो गुना कर दिया जाता है।

· जो शख़्स वक़्ते तआम खाने के बिस्मिल्लाह कहे तो मैं ज़ामिन हूँ कि वह खाना उसको नुक़्सान न करेगा।

· वक़्त खाना खाने के शुक्रे खुदा और याद उसकी और हम्द उसकी करो।

· जिस शख्स को यह पसन्द है कि उसके घर में खैर व बरकत ज़्यादा हो तो उसे चाहिये कि खाना जब हाजिर हो तो वज़ू करे।

· जो कोई नाम ख़ुदा का अव्वल तआम में और शुक्र ख़ुदा का आखि़र तआम पर करे हरगिज़ उस खाने का हिसाब न होगा।

· जो ज़र्रा दस्तरख्वान पर गिरे उनका खाना फक्ऱ को दूर करता है और दिल को इल्म व हिल्म और नूरे ईमान से मुनव्वर करता है।

· जनाबे अमीरूल मोमेनीन अ0 ने फ़रमाया के ऐ फ़रज़न्द! मैं तुमको चार बातें ऐसी बता दूँ जिसके बाद कभी दवा की ज़रूरत न पड़े- 1.जब तक भूख न हो न खाओ।   2. जब भूख बाक़ी हो तो खाना छोड़ दो।  3. खूब चबा कर खाओ। 4. सोने से पहले पेशाब करो।

· रौग़ने ज़ैतून ज़्यादतीए हिकमत का सबब है। (इ0 ज़माना अ0)

· भरे पेट कुछ खाना बाएस कोढ़ और जुज़ाम का होता है। 

ग़ुस्ल और सेहत

· नहार मुँह ग़ुस्ल करने से बलग़म का ख़ात्मा होता है। (इमाम मो0 बाक़िर अ0) 

· नहाने से पहले सर पर सात चुल्लू गरम पानी डालो कि सर दर्द में शिफ़ा हासिल होगी। (इमाम सादिक़ अ0)

· ख़ाली या भरे हुए पेट में हरगिज़ नहीं नहाना चाहिये, बल्कि नहाते वक़्त कुछ ग़िज़ा मेदे में मौजूद होना चाहिए। ताकि मेदा उसे हज़म करने में मशग़ूल रहे, इस तरह मेदे को सुकून मिलता है। (इमाम सादिक़ अ0)

· एक रोज़ दरमियान नहाना गोश्त बदन में इज़ाफ़ा का सबब है। (इमाम मूसा काज़िम अ0)

· नहाना इन्सानी बदन के लिये इन्तेहायी मुफीद है। ग़ुस्ल इन्सानी जिस्म को मोतदिल करता है, मैल कुचैल को जिस्म से दूर करता है आसाब और रगों को नरम करता है और जिस्मानी आ़ा को ताक़त अता करता है। गन्दगी को ख़त्म करता है और जिस्म की जिल्द से बदबू को दूर करता है। (इमाम रिज़ा अ0)

· अगर चाहते हो कि खाल दाने, आबले, जलन से महफ़ूज़ रहे तो नहाने से पहले रौग़ने बनफ़शा बदन पर मलो। (इमाम रिज़ा अ0)

माँ के दूध की अहमियत

· बतौर ग़िज़ा दूध की एहमियत से कौन इनकार कर सकता है, दूध ऐसी मुतावाज़िन ग़िज़ा है जिसमें ग़िज़ा के तमाम अजज़ा (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, विटामिन, मिनीरल और पानी) पाया जाता है। यही सबब है कि दूध बीमारी, सेहत और हर उम्र के अफ़राद के लिये मुफ़ीद है। अगर किसी का जिस्म दूध क़ुबूल न करता हो तो उबालते वक़्त चन्द दाने इलाइची के डाल दें।

· क़ुरआन दूध की अहमियत को इस तरह बयान करता है और चैपायों के वजूद में तुम्हारे पीने के लिये हज़मशुदा ग़िज़ा (फ़रस) और ख़ून में से ख़ालिस और पसन्दीदा दूध फ़राहम करते हैं (सूर-ए-हिजर आयत 66) यानी माँ जो कुछ खाती है उससे फरस बनता है और फिर उससे ख़ून बनता है और उन दोनों के दरमिया में से दूध वुजूद में आता है। मतलब यह कि दूध में हज़म शुदा ग़िज़ा के अजज़ा के साथ ख़ून के अनासिर भी शामिल होते हैं। आयत में दूध को ख़ालिस और मुफ़ीद क़रार दिया गया है।

· दूध के बाज़ अनासिर ख़ून में नही होते और पिसतान के गुदूद में बनते हैं मसलन काज़ईन, ख़ून के कुछ अनासिर बग़ैर किसी तग़य्युर के ख़ून के प्लाज़मा से तुरशह होकर दूध में दाखि़ल होते हैं मसलन मुख़तलिफ़ विटामिन, खूरदनी नामक और मुखतलिफ फासफेट। कुछ और मवाद तबदील हो कर खून से मिलते हैं जैसे दूध में मौजूद लेकटोज़ शकर।

· माहिरीन कहते हैं कि पिसतान में एक लीटर दूध पैदा होने के लिये कम अज़ कम पाँच सौ लीटर ख़ून को उस हिस्से से गुज़रना पड़ता है ताकि दूध के लिये ज़रूरी मवाद ख़ून से हासिल किया जा सके। बच्चा जब पैदा होता है तो उसका दिफ़ाई निज़ाम बहुत कमज़ोर होता है इसलिये माँ के ख़ून में पाये जाने वाले दिफ़ाई अनासिर दूध में मुन्तक़िल होते हैं। तहक़ीक़ात में पाया गया है कि माँ के पहले दूध में कोलेस्ट्रम की मिक़दार बहुत ज़्यादा होती है। चूँकि नव मौलूद का माहौल तबदील होता है इसलिये माँ के पहले दूध में कोलेस्ट्रम की इज़ाफ़ी मिक़दार बच्चे के तहफ़्फ़ुज़ के लिये मुआविन साबित होती है। माँ का दूध बच्चे के लिये सिर्फ़ ग़िज़ा नहीं बल्कि दवा है। क़ुरआन में जनाबे मूसा अ0 की विलादत के बाद इरशाद होता है ‘‘हमने मूसा की माँ को वही की कि उसे दूध पिलाओ और जब तुम्हें उस के बारे में ख़ौफ़ लाहक़ हो तो उसे दरया की मौजों के सिपुर्द कर दो’’ सूर-ए-कसस आयत 7 ।

· दूध में सोडियम, पोटेशियम, कैलशियम, मैगनीशियम, काँसा, ताँबा, आएरन, फासफोरस, आयोडीन और गन्धक वग़ैरा मौजूद होते हैं। इसके अलावा दूध में कारबोनिक ऐसिड, लैक्टोज़ शकर, विटामिन ए, बी, सी मौजूद होते हैं। दूध में कैलशियम काफ़ी मिक़दार में होता है जो पुट्ठों और हड्डियों की नशवोनुमा के लिये बहुत ज़रूरी है यानी दूध एक मुकम्मल ग़िज़ा है इसीलिये रसूले ख़ुदा स0 की हदीस है कि ‘‘दूध के सिवा कोई चीज़ खाने पीने का नेमुल बदल नहीं है’’। हामेला औरत दूध पीयें कि बच्चे की अक़्ल में ज़्यादती का सबब है, मज़ीद फ़रमाया कि दूध पियो कि दूध पीने से ईमान ख़ालिस होता है।

· रवायत में है कि दूध आँखों की बीनाई में इज़ाफ़े का सबब है, निसयान को ख़त्म करता है, दिल को तक़वीयत देता है, और कमर को मज़बूत करता है, शरीअत का हुक्म है कि बच्चे के लिये तमाम दूधों में सबसे बेहतर माँ का दूध है।

· जदीद तहक़ीक़ से आज यह बात साबित हो चुकी है कि माँ का दूध बच्चे के लिये न सिर्फ़ मुकम्मल ग़िज़ा है बल्कि बच्चे को मुख़तलिफ़ बीमारियों से भी महफ़ूज़ रखता है हत्ता पाया गया है कि ऐसे बच्चे जो बचपन में माँ का दूध पीते हैं बड़े होकर भी ज़्यादा फ़अआल ज़हीन, तन्दरूस्त और बहुत सी बीमारियों से बचे रहते हैं।

· क़ुरआन में इरशादे परवरदिगार होता है ‘‘माँयें अपनी औलाद को पूरे दो साल दूध पिलायेंगी’’ सूर-ए-बक़रा अ0 224

· और हमने इन्सान को उसके माँ बा पके बारे में वसीयत की, उसकी माँ ज़हमत पर ज़हमत उठा कर हामेला हुई और उसके दूध पिलाने की मुद्दत 2 साल में मुकम्मल हुई है। सूर-ए-अनकबूत आयत 14 

अनार 

· अनार का नबाताती नाम प्यूनिका ग्रैन्टम है। यूँ तो अनार बहुत से मुल्कों में पाया जाता है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के क़न्धारी अनार मज़े के लिये सबसे ज़्यादा मशहूर हैं। अनार के वह दरख़्त जिनमें फल नहीं आते उसके फूल गुलेनार के नाम से दवाओं में इस्तेमाल होते हैं।

· तहक़ीक़ से यह बात साबित हो चुकी है कि अनार में शकर, कैलशियम, फ़ासफ़ोरस, लोहा, विटामिन सी पायी जाती है। जो ख़ून के बनने और जिस्म की परवरिश में मदद देते हैं इसलिये अनार का फल बीमारी के बाद कमज़ोरी को दूर करने और तन्दरूस्ती को बाक़ी रखने के लिये बहुत मुफ़ीद है।

· रसूले ख़ुदा स0 ने फ़रमाया कि अनारी को बीज के छिलके के साथ खाओ कि पेट को सही करता है, दिल को रौशन करता है और इन्सान को शैतानी वसवसों से बचाता है।

· तिब में अनार का मिज़ाज सर्द तर बताया गया है और दवा के तौर पर मसकन सफ़रा, कातिल करमे शिकम, क़ै, प्यास की ज़्यादती, यरक़ान और ख़ारिश वग़ैरा में इसका इस्तेमाल होता है। बतौर दवा अनार की अफ़ादीयत के बारे में उर्दू का यह मुहावरा ही काफ़ी है। ‘‘एक अनार .......... सौ बीमार’’’

· इस्लामी रिवायत में अनार को सय्यदुल फ़कीहा (फलों का सरदार) कहा गया है। क़ुरआन में भी अनार का ज़िक्र होता है ‘‘इन (जन्नत) में फल कसरत से हैं और खजूर और अनार के दरख़्त हैं’’ (सूर-ए-रहमान आ0 68)

· अहादीस में भी अनार का ज़िक्र हैः ‘‘जो एक पूरा अनार खाये ख़ुदा चालीस रोज़ तक उसके क़ल्ब को नूरानी करता है। शैतान दूर होता है, पेट और ख़ून साफ़ करता है। बदन में फ़ुरती आतीहै और बीमारियों से मुक़ाबले की ताक़त पैदा होती है। (रसूले ख़ुदा स0) 

शहद

· ख़ालिक़े कायनात ने इन्सान को जितनी नेअमतें दी हैं उनका शुमार करना भी इन्सान के लिये मुम्किन नहीं है। उन नेअमतों में शहद को एक बुलन्द मुक़ाम हासिल है।

· क़ुरआन (सूर-ए-नहल आयत 49) में शहद को इन्सान के लिये शिफ़ा बताया गया है। इन्जील में 21 मरतबा इसका ज़िक्र किया गया है। जदीद साइंसी तहक़ीक़ात से यह बात साबित हो चुकी है कि शहद निस्फ़ हज़्म शुदा ग़िज़ा है जिसका मेदे पर बोझ नहीं पड़ता है इसीलिये नौ ज़ाएदा बच्चे को बतौर घुट्टी शहद घटाया जाता है और जाँ-बलब मरीज़ के लिये तबीब आखि़री वक़्त में शहद ही तजवीज़ करता है। अहादीस में भी दवा की हैसियत से शहद की ख़ासियत का बहुत ज़िक्र आया है। ‘‘लोगों के लिये शहद की सी शिफ़ा किसी चीज़ में नहीं है’’ (इमाम सादिक़ अ0)। ‘‘जो शख़्स महीने में कम अज़ कम एक मरतबा शहद पिये और ख़ुदा से उस शिफ़ा का तक़ाज़ा करे कि जिस का क़ुरआन में ज़िक्र है तो वह उसे सत्तर क़िस्म की बीमारियों से शिफ़ा बख़्शेगा’’। (रसूले ख़ुदा स0) 

फवाएदे आबे नैसाँ

· ज़ादुल मसाल में सय्यद जलील अली इब्ने ताऊस रहमतुल्लाह अलैह ने रिवायत की है कि असहाब का एक गिरोह बैठा हुआ था जनाबे रसूले ख़ुदा स0 वहाँ तशरीफ लाए और सलाम किया असहाब ने जवाबे सलाम दिया। आपने फ़रमाया कि क्या तुम चाहते हो कि तुम्हें वह दवा बतला दूँ जो जिबराईल अ0 ने मुझे तालीम दी है कि जिसके बाद हकीमों की दवा के मोहताज न रहो। जनाबे अमीरूल मोमेनीन अ0 और जनाबे सलमाने फ़ारसी वग़ैरा ने सवाल किया कि वह दवा कौन सी है तो हज़रत रसूले ख़ुदा स0 ने हज़रत अमीर अ0 से मुख़ातिब होकर फ़रमाया माह नैसान रूमी में बारिश हो तो बारिश का पानी किसी पाक बरतन में ले और सूर-ए-अलहम्द, आयतल कुर्सी, क़ुल हो वल्लाह, कु़ल आऊज़ो बिरब्बिन नास, कु़ल आऊज़ो बिरब्बिल फ़लक़ और क़ुल या अय्योहल काफ़िरून सत्तर मरतबा पढ़ो और दूसरी रिवायत में है सत्तर मरतबा इन्ना अनज़लनाह, अल्लाहो अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह और सलवात मोहम्मद स0 व आले मोहम्मद अ0 भी इस पर पढ़ें। किसी शीशे के पाक बरतन में रखें और सात दिन तक हर रोज़ सुब्ह व वक़्ते अस्र इस पानी को पिये। मुझे क़सम है उस ज़ाते अक़दस की जिसने मुझे मबऊस ब-रिसालत किया कि जिबराईल अ0 ने कहा कि ख़ुदाए तआला ने दूर किया उस शख़्स का हर दर्द कि जो उसके बदन में है। अगर फ़रज़न्द न रखता हो तो फ़रज़न्द पैदा हो। अगर औरत बांझ हो और पिये तो फ़रज़न्द पैदा होगा। अगर नामर्द हो और पानी बशर्ते एतेक़ाद पिये तो क़ादिर हो मुबाशिरत पर। अगर दर्दे सर या दर्दे चश्म हो तो एक क़तरा आँख में डाले और पिये और मले सेहत होगी और जड़ें दाँतों की मज़बूत होंगी और मुंह ख़ुशबूदार होगा, बलग़म को दूर करेगा। दर्दे पुश्त, दर्दे शिकम और ज़ुकाम को दफ़ा करेगा। नासूर, खारिश, फ़ोड़े दीवानगी, जज़ाम, सफ़ेद दाग़, नकसीर और क़ै से बे ख़तर होगा। अंधा, बहरा गूँगा न होगा। वसवसा-ए-शैतान और जिन से अज़ीयत न होगी। दिल को रौशन करेगा, ज़ुबान से हिकमत जारी करेगा और उसे बसीरत व फ़हम अता करेगा। माहे नौरोज़ के 23 दिन बाद माह-ए-नैसाँ रूमी शुरू होता है।